सुबह आई तो सब कुछ बदल गया: स्मृतियाँ बिखरीं, पहचान लौट आई। पर उन बेनाम पलों ने जोयाके भीतर कुछ स्थायी छाप छोड़ दी—एक समझ, एक जख्म और एक चिंगारी जो कहीं देर तक धधकती रही। रंगीन कहानियाँ यूँ ही खत्म नहीं होतीं; वे बदलती परिस्थिति में एक धुन बनकर रह जाती हैं—कभी कोमल, कभी तेज़, और हमेशा यादों में जिंदा।